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दिसंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सहायक ग्रेड - २(कैशियर) को सामाजिक अंकेक्षण का विकासखंड नोडल अधिकारी बनाये जाने पर जॉब चार्ट

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सहायक ग्रेड - २ (कैशियर) को सामाजिक अंकेक्षण का विकासखंड नोडल अधिकारी बनाये जाने पर जॉब चार्ट

मनरेगा (महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम - मध्यप्रदेश ) अंतर्गत पदस्थ अधिकारी / कर्मचारी का जॉब चार्ट

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मनरेगा (महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम - मध्यप्रदेश ) अंतर्गत पदस्थ अधिकारी / कर्मचारी का जॉब चार्ट मनरेगा (महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम - मध्यप्रदेश ) अंतर्गत पदस्थ अधिकारी / कर्मचारी का जॉब चार्ट

मोबाइल गम हो जाने पर कैसे खोजे

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मोबाइल गम हो जाने पर कैसे खोजे

संघ प्रार्थना

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्। महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥१॥ प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता इमे सादरं त्वां नमामो वयम् त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम् शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये। अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम् सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत् श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गम् स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्॥२॥ समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम् परं साधनं नाम वीरव्रतम् तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्। विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर् विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम् समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥३॥ ॥भारत माता की जय॥

कौन सा व्यक्ति किस राशि का है?

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ऐसे समझें, कौन सा व्यक्ति किस राशि का है? कुंडली के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का नाम रखा गया है तो उसके नाम का पहला अक्षर जैसा होता है वैसी ही उसकी राशि मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां बताई गई हैं। सभी राशियों के लिए अलग-अलग नाम अक्षर निर्धारित किए गए हैं। कुंडली के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का नाम रखा गया है तो उसके नाम का पहला अक्षर जैसा होता है वैसी ही उसकी राशि मानी जाती है। इन्हीं राशियों पर सभी का भूत-भविष्य और वर्तमान निर्भर करता है। इन राशियों का स्वरूप अलग-अलग होता है। व्यक्ति की राशि के आधार पर ही उसके स्वभाव का आंकलन किया जाता है। जानिए राशियों का स्वरूप और उनके नाम अक्षर- मेष: मेष राशि भेड़ का समान होती है। इस राशि के लोगों के नाम अक्षर चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ होते हैं। वृष: इस राशि में बैल का चित्र दिखाई देता है। वृषभ राशि के लोग ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो नाम अक्षर के होते हैं। मिथुन: इस राशि में नारी व पुरुष का युग्म, नारी के हाथ में वीणा और पुरुष के हाथ में धारण किए हुए चिन्ह होते हैं। मिथुन राशि के लोगों के नाम का पहला अक्...

लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला

भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे राम जी से दूर हो जाते! माता -सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा!! क्या कहूंगा!! यदि बिना बताए जाऊंगा तो रो रो कर जान दे देगी और यदि बताया तो साथ जाने की ज़िद्द करने लगेगी और कहेगी कि यदि सीता जी अपने पति के साथ जा सकती हैं तो मैं क्यों नहीं!! यहीं सोच विचार कर के लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल हाथ में लेकर खड़ी थीं और बोलीं- "आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु की सेवा में वन को जाओ। मैं आपको नहीं रोकुंगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।" लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था। परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया। वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है। पति संकोच में पड़े, उसस...

शिव स्वरोदय, स्वर विज्ञान

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शिव स्वरोदय 'शिव स्वरोदय' स्वरोदय विज्ञान पर अत्यन्त प्राचीन ग्रंथ है। इसमें कुल 395 श्लोक हैं। यह ग्रंथ शिव-पार्वती संवाद के रूप में लिखा गया है। महेश्वरं नमस्कृत्य शैलजां गणनायकम्। गुरुं च परमात्मानं भजे संसार तारकम्।।1।। अन्वय -- महेश्वरं शैलजां गणनायकं संसारतारकं गुरुं च नमस्कृत्य परमात्मानं भजे। अर्थ:- महेश्वर भगवान शिव, माँ पार्वती, श्री गणेश और संसार से उद्धार करने वाले गुरु को नमस्कार करके परमात्मा का स्मरण करता हूँ। देवदेव महादेव कृपां कृत्वा ममोपरि। सर्वसिद्धिकरं ज्ञानं वदयस्व मम प्रभो।।2।। अन्वय -- देवदेव महादेव यम प्रभो यमोपरि कृपां कृत्वा सर्वसिद्धिकरं ज्ञानं वदयस्व। अर्थ:- माँ पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि हे देवाधिदेव महादेव, मेरे स्वामी, मुझ पर कृपा करके सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाले ज्ञान प्रदान कीजिए। कथं बह्माण्डमुत्पन्नं कथं वा परिवर्त्तते। कथं विलीयते देव वद ब्रह्माण्डनिर्णयम्।।3।। अन्वय -- देव, कथं ब्रहमाण्डं उत्पन्नं, कथं परिवर्तते, कथं विलीयते वा ब्रहमाण्ड-निर्णयं च वद। अर्थ:- हे देव, मुझे यह बताने की कृपा करें कि यह...