उत्तम खेती मध्यम बान, आधम चाकरी करे निदान
#__अधम_चाकरी_करे_निदान_
हमारे बुजुर्ग बहुत ज्ञानवान, गुणीं और चतुर थे। आज हम जिन परिस्थितियों से गुजर कर आगे बढ़ रहे हैं, इनकी व्याख्या वे पहले ही कर चुके हैं। यदि हम उनके बतलाये रास्तों पर ध्यान नहीं देते तो ये हमारा दोष है।
एक कहावत सभी ने सुनी होगी।
उत्तम खेती मध्यम बान, आधम चाकरी करे निदान। ये कहावत उन लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए बनाई गई है जो कि, जीवन यापन के लिए कुछ करने की सोच रहे हैं। इसमें खेती यानि कृषि को सर्वश्रेष्ठ निरूपित किया गया है। यह बात उन लोगों से समझी जा सकती है जो कि इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और निरंतर प्रगतिशील हैं। दूसरी बात वाणिज्य व्यापार के लिए कही गई है, कि कोई सा भी व्यापार किया जावे, स्वतंत्रता के साथ आत्मनिर्भरता भी कायम रह सकती है। उपरोक्त में से दोनों कार्य न कर पाने की स्थिति में नौकरी-चाकरी के विकल्प पर विचार करने की राय दी गई है।
मैं महामहिम राज्यपाल जी की बात से पूर्णतया सहमत हूँ। नौकर नौकर होता है फिर वह कितना ही बड़ा क्यों न हो। इसके उदाहरण स्वरूप हमने ऐसे बहुत से लोगों को देखा है जो कि, बहुत बड़े बड़े पदों पर नौकरी करते हुए सर्वोच्च पदों तक तो जा पहुंचे लेकिन वहां पहुचने के बाद भी उनकी नौकरी वाली मानसिक गुलामी दिमाग से निकल नहीं सकी, नतीजा पुतले की तरह काम करके वे स्वयं निकल गये। मैं सिर्फ उसूलों की बात कर रहा हूं, किसी पर आक्षेप लगाना मेरा मकसद नहीं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें