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प्रसिद्ध लोगों का जन्मदिन / Birthday of famous people

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प्रसिद्ध लोगों का जन्मदिन / Birthday of famous people जानने के लिये यह साईड का उपयोग कर सकते है - https://www.sarkarijobguide.com/famous-peoples-birthday/

Always Up-to-Date Guide to Social Media Image Sizes

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  Always Up-to-Date Guide to Social Media Image Sizes Last Updated: August 26, 2020 Whether it’s a brand promotion, video, news update or even a meme, visual content rules the social media landscape. What has become so important is effectively conveying your brand on social media through images and video. In this quick-scroll world of social media, the visual face of your brand is often times the first thing your audience sees and possibly the one thing they remember. It’s hard to cut and paste an image and reuse it across all of your social networks unless you have a tool like  Landscape . Sprout Social’s very own tool is free to use to resize, crop and scale social media image sizes. And along with our resizing tool, we’ve provided all the specific dimensions and a few quick tips to help you decide which image best fits each position. Before we get into it, here are some additional resources: Easily reference this social media image sizes list in our  always up-to-...

सकारात्मक सोच

एक महिला ने गौतम बुद्घ से कहा - मैं आपसे शादी करना चाहती हूँ"। गौतम बुद्ध ने पूछा- "क्यों देवी ? महिला ने जवाब दिया -"क्योंकि मुझे आपके जैसा ही एक पुत्र चाहिए, जो पूरी दुनिया में मेरा नाम रौशन करे और वो केवल आपसे शादी करके ही मिल सकता है मुझे"। गौतम बुद्ध कहते हैं - "इसका और एक उपाय है" महिला पूछती है -"क्या"? गौतम बुद्ध ने मुस्कुराते हुए कहा -"आप मुझे ही अपना पुत्र मान लीजिये और आप मेरी माँ बन जाइए ऐसे में आपको मेरे जैसा पुञ मील जायेगा. महिला हतप्रभ होकर गौतम बुद्ध को ताकने लगी और रोने लग गयी, ये होती है महान लोगो की विचार धारा । "पूरे समुंद्र का पानी भी एक जहाज को नहीं डुबा सकता, जब तक पानी को जहाज अन्दर न आने दे। इसी तरह दुनिया का कोई भी नकारात्मक विचार आपको नीचे नहीं गिरा सकता, जब तक आप उसे अपने अंदर आने की अनुमति न दें।" "अंदाज़ कुछ अलग हैं मेरे सोचने का,, सब को मंजिल का शौक है और मुझे रास्तों का... ये दुनिया इसलिए बुरी नही के यहाँ बुरे लोग ज्यादा है। बल्कि इसलिए बुरी है कि यहाँ अच्छे लोग खामोश है..!

पत्नी हो तो ऐसी

बेटा अब खुद कमाने वाला हो गया था ...इसलिए  बात-बात पर  अपनी माँ से झगड़ पड़ता था .... ये  वही माँ थी जो बेटे के  लिए पति से भी लड़ जाती थी।मगर अब फाइनेसिअली   इंडिपेंडेंट बेटा  पिता के कई बार समझाने पर भी  इग्नोर  कर देता और कहता, "यही तो उम्र है शौक की, खाने पहनने की, जब  आपकी तरह मुँह में दाँत और पेट में आंत ही नहीं रहेगी तो क्या करूँगा।" * बहू खुशबू  भी भरे पूरे परिवार से आई थी, इसलिए बेटे की गृहस्थी की खुशबू में रम गई थी। बेटे की नौकरी  अच्छी थी तो  फ्रेंड सर्किल  उसी हिसाब से मॉडर्न थी । बहू को अक्सर वह पुराने स्टाइल के कपड़े छोड़ कर मॉडर्न बनने को कहता, मगर बहू मना कर देती .....वो कहता "कमाल करती हो तुम, आजकल सारा ज़माना ऐसा करता है, मैं क्या कुछ नया कर रहा हूँ। तुम्हारे सुख के लिए सब कर रहा हूँ और तुम हो कि उन्हीं पुराने विचारों में अटकी हो। क्वालिटी लाइफ क्या होती है तुम्हें मालूम ही नहीं।" * और बहू कहती "क्वालिटी लाइफ क्या होती है, ये मुझे जानना भी नहीं है, क्योकि  लाइफ की क्वालिटी क्या हो, मैं इस बात में विश्...

1 दिसम्बर 1938 स्वधर्म रक्षक तालोम रुकबो

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1 दिसम्बर 1938 स्वधर्म रक्षक तालोम रुकबो  पूर्वोत्तर भारत का सुदूर अरुणाचल प्रदेश चीन से लगा होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। पहले उसे नेफा कहा जाता था। वहाँ हजारों वर्ष से रह रही जनजातियाँ सूर्य और चन्द्रमा की पूजा करती हैं; पर वे उनके मन्दिर नहीं बनातीं। इस कारण पूजा का कोई व्यवस्थित स्वरूप भी नहीं है। इसका लाभ उठाकर ईसाई मिशनरियों ने उन्हें हिन्दुओं से अलग करने का षड्यन्त्र किया। उन्होंने निर्धन एवं अशिक्षित वनवासियों की मजबूरी का लाभ उठाया और लालच देकर हजारों लोगों को ईसाई बना लिया। अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट जिले में एक दिसम्बर, 1938 को जन्मे श्री तालोम रुकबो  ने शीघ्र ही इस खतरे को पहचान लिया। वे समझते थे कि ईसाइयत के विस्तार का अर्थ देशविरोधी तत्वों का विस्तार है। इसलिए उन्होंने आह्नान किया कि अपने परम्परागत त्योहार सब मिलकर मनायें। उन्होंने विदेशी षड्यन्त्रकारियों द्वारा जनजातीय आस्था पर हो रहे कुठाराघात को रोकने के लिए पूजा की एक नई पद्धति विकसित की। उनके प्रयासों का बहुत अच्छा फल निकला। राज्य शासन ने भी स्थानीय त्योहार ‘सोलुंग’ को सरका...

1 दिसम्बर 1886 देशानुरागी राजा महेन्द्र प्रताप सिंह

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1 दिसम्बर 1886 देशानुरागी राजा महेन्द्र प्रताप सिंह राजा महेन्द्र प्रताप सिंह ऐसे स्वाधीनता सेनानी थे, जिन्होंने विदेशों में रहकर देश की आजादी के लिए प्रयास किये। उनका जन्म मुरसान (हाथरस, उ.प्र.) के एक प्रसिद्ध जाट राजवंश में एक दिसम्बर, 1886 को हुआ था। वे अपने पिता राजा घनश्याम सिंह के तीसरे पुत्र थे। उनका लालन-पालन और प्राथमिक शिक्षा वृंदावन में हुई। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ के मोहम्मडन एंग्लो ओरियंटल कॉलिज से प्रथम श्रेणी में एम.ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। यही विद्यालय आजकल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कहलाता है।   एक बार उन्होंने देखा कि एक प्रदर्शिनी में छोटी सी बात पर एक छात्र की पुलिस वालों से झड़प हो गयी। प्रधानाचार्य ने इस पर उसे तीन साल के लिए विद्यालय से निकाल दिया। इसके विरोध में राजा महेन्द्र प्रताप के नेतृत्व में छात्रों ने हड़ताल कर दी। उस समय वे बी.ए के छात्र थे। उनके ओजस्वी भाषण से नाराज होकर उन्हें भी विद्यालय से निकाल दिया गया।  राजा महेन्द्र प्रताप अपने पिताजी तथा एक अध्यापक श्री अशरफ अली से बहुत प्रभावित थे, जो हिन्दू धर्म व संस्कृति से प्रे...