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अक्टूबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्री नर्मदाष्टकम

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नर्मदा नदी श्री नर्मदाष्टकम सबिंदु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितम द्विषत्सु पाप जात जात कारि वारि संयुतम कृतान्त दूत काल भुत भीति हारि वर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 1 त्वदम्बु लीन दीन मीन दिव्य सम्प्रदायकम कलौ मलौघ भारहारि सर्वतीर्थ नायकं सुमस्त्य कच्छ नक्र चक्र चक्रवाक् शर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 2 महागभीर नीर पुर पापधुत भूतलं ध्वनत समस्त पातकारि दरितापदाचलम जगल्ल्ये महाभये मृकुंडूसूनु हर्म्यदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 3 गतं तदैव में भयं त्वदम्बु वीक्षितम यदा मृकुंडूसूनु शौनका सुरारी सेवी सर्वदा पुनर्भवाब्धि जन्मजं भवाब्धि दुःख वर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 4 अलक्षलक्ष किन्न रामरासुरादी पूजितं सुलक्ष नीर तीर धीर पक्षीलक्ष कुजितम वशिष्ठशिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 5 सनत्कुमार नाचिकेत कश्यपात्रि षटपदै धृतम स्वकीय मानषेशु नारदादि षटपदै: रविन्दु रन्ति देवदेव राजकर्म शर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 6 अलक्षलक्ष लक्षपाप लक्ष सार सायुधं ततस्तु जीवजंतु तंतु भुक्तिमुक्ति दायकं विरन्ची विष्...

कार्य व्यवस्था

सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की। सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा? महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो। विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है। भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया। श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,  उनके भाई बलराम खेती करते थे, हमेशा हल साथ रखते थे। यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्रीकृषण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया। राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे। उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार। वर...

वाल्मीकि जयंती

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*राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा चल समारोह का स्वागत* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के *समरसता विभाग* द्वारा आज दिनांक 20 अक्टूबर को महाराजा अजमीढ़ देव जी जयंती पर अग्रसेन चौराहे पर स्वर्णकार समाज के बंधुओं का ।  वाल्मीकि जयंती के अवसर पर वाल्मीकि समाज द्वारा आयोजित चल समारोह का स्वागत पूजन कर सभी को तिलक वंदन लालीपुर तिराहे में, एवं श्री श्री विद्यासागर जी महाराज के जन्मदिवस पर जैन मंदिर पडाव पर पूजन  किया गया है। चल समारोह के इस स्वागत कार्यक्रम में मण्डला नगर में निवासरत संघ के सभी स्वयंसेवक बंधु व सम्मानित सभी जाति के बंधु उपस्थित रहे।

विजया दशमी 15.10.2021 मंडला

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https://www.media-today.in/2021/10/16/भारत-माता-को-परम-वैभव-के-शि/

अशोक सम्राट

*सम्राट अशोक* *मैं बहुत सोचता हूं पर उत्तर नहीं मिलता! आप भी इन प्रश्नों पर विचार करें!* *१. जिस सम्राट के नाम के साथ संसार भर के इतिहासकार “महान” शब्द लगाते हैं;* *२. जिस सम्राट का राज चिन्ह "अशोक चक्र" भारतीय अपने ध्वज में लगते हैंं;* *३. जिस सम्राट का राज चिन्ह "चारमुखी शेर" को भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक मानकर सरकार चलाते हैं, और "सत्यमेव जयते" को अपनाया है;* *४. जिस देश में सेना का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान सम्राट अशोक के नाम पर "अशोक चक्र" दिया जाता है;* *५. जिस सम्राट से पहले या बाद में कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नहीं हुआ, जिसने अखंड भारत (आज का नेपाल, बांग्लादेश, पूरा भारत, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान) जितने बड़े भूभाग पर एक-छत्र राज किया हो;* *६. सम्राट अशोक के ही समय में २३ विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई, जिसमें तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला, कंधार आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे! इन्हीं विश्वविद्यालयों में विदेश से कई छात्र शिक्षा पाने भारत आया करते थे;* *७. जिस सम्राट के शासन काल को विश्व के बुद्धिजीवी और इतिहासकार भारतीय इतिहास का सबसे स्वर्णिम...

उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती,ये देश है पुकारता, पुकारती माँ भारती ।

उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, ये देश है पुकारता, पुकारती माँ भारती । उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, ये देश है पुकारता, पुकारती माँ भारती । रगों में तेरे बह रहा है खून राम-श्याम का, जगदगुरु गोविन्द और राजपूती शान का । तू चल पड़ा तो चल पड़ेगी साथ तेरे भारती, ये देश है पुकारता,पुकारती माँ भारती ॥ है शत्रु दनदना रहा चहुँ दिशा में देश की, पता बता रही हमे किरण किरण दिनेश की । वो चक्रवर्ती विश्वजयी मातृभूमी हारती, ये देश है पुकारता,पुकारती माँ भारती ॥ उठा कदम,बढ़ा कदम,कदम-कदम बढ़ाये जा, कदम-कदम पे दुश्मनों के धड़ से सर उड़ाए जा । उठेगा विश्व हाँथ जोड़ करने तेरी आरती , ये देश है पुकारता,पुकारती माँ भारती ॥ उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती, वृन्दावन धाम अपार, जपे जा राधे राधे, राधे सब वेदन को सार, जपे जा राधे राधे।   बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया, बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो   बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार, चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा   गोवर्धन वासी सांवरे, गोवर्धन वासी तुम बिन रह्यो न जाय, गोवर्धन वासी   सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी यह त...

विधि का विधान

*🟣 विधि का विधान 🟣* *भगवान श्री राम जी का विवाह और राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त देख कर ही किया गया था, फिर भी ना वैवाहिक जीवन सफल हुआ और ना ही राज्याभिषेक।* *और जब मुनि वशिष्ठ से*  *इसका जवाब मांगा गया तो*  *उन्होंने साफ कह दिया-* *सुनहु भरत भावी प्रबल*           *बिलखि कहेहूं मुनिनाथ* *लाभ-हानि जीवन-मरण*           *यश - अपयश  विधि  हाथ* *👉🏿अर्थात:-*       *जो विधि ने निर्धारित किया है।*        *वही होकर रहेगा।* *ना भगवान श्री राम जी के*  *जीवन को बदला जा सका और*  *ना ही भगवान श्री कृष्ण जी के।* *ना ही भगवान शिव, सती की मृत्यु* *को टाल सके, जबकि महामृत्युंजय*  *मंत्र उन्हीं का आह्वान करता है।* *ना श्री गुरु अर्जुन देव जी, ना श्री गुरु तेग बहादुर जी और ना ही दश्मेश पिता श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल सके, जबकि आप सब समर्थ थे।* *रामकृष्ण परमहंस जी भी* *अपने कैंसर को ना टाल सके।* *ना रावण अपने जीवन को बदल*  *पाया और ना ही कंस, ...

चूना

#चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसकी एक डिब्बी ला कर घर में रखे . - यह सत्तर प्रकार की बीमारियों को ठीक कर देता है . गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी #पीलिया ठीक हो जाता है . - चूना #नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है - अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे . जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उन्हें भी इस चूने का सेवन करना चाहिए . - #शुगर  रोज़ सुबह ख़ाली पेट एक गिलास पानी में एक छोटे चने के बराबर चुना मिलकर पीने से शुगर जड़ से ख़त्म हो जाती हैं ( समय समय पर जाँच करवाते रहे.. वरना शुगर का लेवल माइनस भी हो सकता हैं ) - विद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो #लम्बाई बढाता है - गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिला के या पानी में मिला के लिया जा सकता है - इससे लम्बाई बढने के साथ साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छी होती है । जिन बच्चों की बुद्धि कम है ऐसे मतिमंद बच्चों के लिए सबसे अच्छी दवा है चूना . जो बच्चे बुद्धि से...

“मैं न होता, तो क्या होता?”*

*सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें जो सदैव अनुकरणीय एवं प्रासंगिक है*... *“मैं न होता, तो क्या होता?”* “अशोक वाटिका" में *जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा* , तब हनुमान जी को लगा, कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सर काट लेना चाहिये! किन्तु, अगले ही क्षण, उन्हों ने देखा  *"मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !* यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि  *यदि मै न होता, तो सीता जी को कौन बचाता?* बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मैं न होता, तो क्या होता ?  परन्तु ये क्या हुआ? सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये,  *कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं!* आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!" तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है , *और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है, एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या क...

नई संस्था

: जब कोई नई संस्था बनती है तो पहले ही उसका नाम संविधान, कार्यालय, धन-संग्रह आदि की चर्चा होती है. इसके विपरीत डॉ. हेडगेवार ने आरएसएस की स्थापना अनौपचारिक ढंग से की. उन्होंने विजयादशमी के दिन 15-20 चुनिंदा लोगों को अपने घर में इकट्ठा किया और कहा कि आज से हम संघ शुरू कर रहे हैं. ब्रिटिशकालीन भारत में हिंदुओं को संगठित के उद्देश्य से संघ की स्थापना हुई.  डॉ. हेडगेवार ने कलकत्ता से मेडिकल की परीक्षा पास की थी. उन्होंने ही संघ के शुरुआती कार्यकर्ताओं के साथ विचार कर संघ के शाखा कार्य की शुरुआत की और इसका विकास किया. प्रारम्भ में संघ के सदस्यों को ‘ सभासद ’ कहा जाता था. संघ के सभासदों से इतनी अपेक्षा थी कि वे किसी भी व्यायामशाला में जाकर पर्याप्त व्यायाम करें. सप्ताह में एक बार सभी सभासद एकत्रित होते थे.  इतवार दरवाजा प्राथमिक शाला के मैदान में हर रविवार प्रातः 5 बजे होने वाले इस एकत्रीकरण में ‘ सैनिक शिक्षण’  का अभ्यास होता था जिसे आज संघ में समता कहा जाता है.   सप्ताह में दो दिन विभिन्न विषयों पर भाषण होते थे. इनको ‘ राजकीय वर्ग ’ कहा जाता था. 1927 से ‘ राजकीय वर्ग ...