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चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना ।

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चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना । Charaiveti Charaiveti yahi to mantra hai apna . गणगीत  चरैवेति-चरैवेति, यही तो मंत्र है अपना । नहीं रुकना, नहीं थकना, सतत चलना सतत चलना । यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्र है अपना ॥ध्रु॥           हमारी प्रेरणा भास्कर, है जिनका रथ सतत चलता।           युगों से कार्यरत है जो, सनातन है प्रबल ऊर्जा।           गति मेरा धरम है जो, भ्रमण करना भ्रमण करना।          यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्र है अपना ॥१॥ हमारी प्रेरणा माधव, है जिनके मार्ग पर चलना। सभी हिन्दू सहोदर हैं, ये जन-जन को सभी कहना। स्मरण उनका करेंगे और, समय दे अधिक जीवन का। यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्र है अपना ॥२॥         हमारी प्रेरणा भारत, है भूमि की करें पूजा।         सुजल-सुफला सदा स्नेहा, यही तो रूप है उसका।         जिएं माता के कारण हम, करें जीवन सफल अपना।        यही तो मंत्र है अपना, शुभंकर मंत्...

उठो जवानो हम भारत के स्वाभी मान सरताज़ है

उठो जवानो हम भारत के स्वाभी मान सरताज़ है उठो जवानो हम भारत के स्वाभी मान सरताज़ है अभिमन्यु के रथ का पहिया, चक्रव्यूह की मार है चमके कि ज्यों दिनकर चमका है उठे कि ज्यो तूफान उठे चले चाल मस्ताने गज सी हँसे कि विपदा भाग उठे हम भारत की तरुणाई है माता की गलहार है अभिमन्यु के रथ का पहिया…. खेल कबड्डी कहकर पाले में न घुस पाये दुश्मन प्रतिद्वंदी से ताल ठोक कर कहो भाग जाओ दुश्मन मान जीजा के वीर शिवा हम राणा के अवतार है अभिमन्यु के रथ का पहिया…. गुरु पूजा में एकलव्य हम बैरागी के बाण है लव कुश की हम प्रखर साधना शकुंतला के प्राण है चन्द्रगुप्त की दिग्विजयों के हम ही खेवनहार है अभिमन्यु के रथ का पहिया…. गोरा, बदल, जयमल, पत्ता, भगत सिंह, सुखदेव, आज़ाद केशव की हम ध्येय साधना माधव बन होती आवाज़ आज नहीं तो कल भारत के हम ही पहरेदार है अभिमन्यु के रथ का पहिया…. उठो जवानो हम भारत के स्वाभी मान सरताज़ है अभिमन्यु के रथ का पहिया, चक्रव्यूह मार है…

guru poornima

गुरु पूर्णिमा  सनातन धर्म की संस्कृति है। डा0 श्री प्रकाश बरनवाल राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रबुद्ध सोसाइटी का कहना है कि परमेश्वर शिव दक्षिणामूर्ति रूप में समस्त ऋषि मुनियों को शिष्य के रूप शिवज्ञान प्रदान किया था। उनका स्मरण करते हुए गुरुपूर्णिमा मनायी जाती है। गुरु पूर्णिमा उन सभी आध्यात्मिक और अकादमिक गुरुजनों को समर्पित परम्परा है जिन्होंने  कर्म योग  आधारित व्यक्तित्व विकास और प्रबुद्ध करने, बहुत कम अथवा बिना किसी मौद्रिक खर्चे के अपनी बुद्धिमता को साझा करने के लिए तैयार हों। इसको भारत, नेपाल और भूटान में हिन्दू, जैन और बोद्ध धर्म के अनुयायी उत्सव के रूप में मनाते हैं। इस पर्व को  हिन्दू ,  बौद्ध  और  जैन  अपने आध्यात्मिक शिक्षकों / अधिनायकों के सम्मान और उन्हें अपनी कृतज्ञता दिखाने के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व  हिन्दू पंचांग  के हिन्दू माह  आषाढ़  की पूर्णिमा (जून-जुलाई) मनाया जाता है। [5] [6]  इस उत्सव को  महात्मा गांधी  ने अपने आध्यात्मिक गुरु  श्रीमद राजचन्द्र  को सम्मान देने के लिए पुनर्जीवित कि...

स्‍वर विज्ञान स्‍वामी मुक्‍तानंद जी द्वारा

स्वामी शिवानंद सरस्वती स्वामी शिवानंद का जन्म 1887 में तमिलनाडु के पट्टामदई में हुआ था मलाया में एक चिकित्सा चिकित्सक के रूप में सेवारत, उसने अपना अभ्यास त्याग दिया, चला गया ऋषिकेश और स्वामी द्वारा 1924 में दशनामी संन्यास में दीक्षित किया गया था विश्वानंद सरस्वती। उन्होंने दौरा किया पूरे भारत में व्यापक रूप से, प्रेरक लोग योग का अभ्यास करें और नेतृत्व करें दिव्य जीवन। उन्होंने दिव्य जीवन की स्थापना की 1936 में ऋषिकेश में सोसायटी, 1945 में शिवानंद आयुर्वेदिक फार्मेसी, योग वेदांत वन 1948 में अकादमी और 1957 में शिवानंद नेत्र अस्पताल। के दौरान अपने जीवनकाल में स्वामी शिवानंद ने हजारों शिष्यों का मार्गदर्शन किया और दुनिया भर में उम्मीदवारों और 200 से अधिक पुस्तकों के लेखक। स्वामी सत्यानंद सरस्वती स्वामी सत्यानंद का जन्म अल्मोड़ा में हुआ था। उत्तर प्रदेश, 1923 में। 1943 में उनकी मुलाकात हुई ऋषिकेश में स्वामी शिवानंद और दशनामी सन्यास का मार्ग अपनाया जीवन का। 1955 में उन्होंने अपने गुरु के आश्रम को छोड़ दिया एक भटकते हुए भिखारी के रूप में रहने के लिए और बाद में अंतर्राष्ट्रीय योग की स्थापना की...

अमरनाथ गुफा का सच

✴️☀️अमरनाथ गुफा का सच☀️✴️ ~••~••~••~••~••~••~••~••~••~••~ #narayankavach    पैगंबर मोहम्मद का जब जन्म भी नहीं हुआ था, तब से अमरनाथ गुफा में हो रही है पूजा-अर्चना ! इसलिए इस झूठ को नकारीये कि अमरनाथ गुफा की खोज एक मुस्लिम ने की थी ! जानिए अमरनाथ का पूरा इतिहास ताकि आप भी अपने बच्चों को बता सकें..... बाबा बर्फानी के दर्शन के अमरनाथ यात्रा शुरू हो गयी है। अमरनाथ यात्रा शुरू होते ही फिर से सेक्युलरिज्म के झंडबदारों ने गलत इतिहास की व्याख्या शुरू कर दी है कि इस गुफा को 1850 में एक मुसलिम बूटा मलिक ने खोजा था! पिछले साल तो पत्रकारिता का गोयनका अवार्ड घोषित करने वाले इंडियन एक्सप्रेस ने एक लेख लिखकर इस झूठ को जोर-शोर से प्रचारित किया था। जबकि इतिहास में दर्ज है कि जब इसलाम इस धरती पर मौजूद भी नहीं था, यानी इसलाम पैगंबर मोहम्मद पर कुरान उतरना तो छोडि़ए, उनका जन्म भी नहीं हुआ था, तब से अमरनाथ की गुफा में सनातन संस्कृति के अनुयायी बाबा बर्फानी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कश्मीर के इतिहास पर कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ और नीलमत पुराण से सबसे अधिक प्रकाश पड़ता है। श्रीनगर से 141 किलोमीटर दूर 388...