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कभी पेशाब रुक जाए तो क्या करें

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कभी पेशाब रुक जाए तो क्या करें           यह एक प्रसिद्ध एलोपैथी चिकित्सक 70 वर्षीय ईएनटी विशेषज्ञ का अनुभव है।   आइए सुनते हैं अनुठा अनुभव..👉    एक सुबह वे अचानक उठे।  उन्हें मुत्रत्याग करने की जरूरत थी, लेकिन वे कर नहीं सके (कुछ लोगों को बाद की उम्र में कभी-कभी यह समस्या होती है)। उन्होंने बार-बार कोशिश की, लेकिन लगातार कोशिश नाकाम रही। तब उन्होंने महसूस किया कि एक समस्या खड़ी हो गयी है। एक डॉक्टर होने के नाते, वे ऐसी शारीरिक समस्याओं से अछूते नहीं थे; उनका निचला पेट भारी हो गया। बैठना या खड़े़ रहना दुस्वार होने लगा, तल-पेट में दबाव बढ़ने लगा । तब उन्होंने एक जाने-माने यूरोलॉजिस्ट को फोन पर बुलाया और स्थिति के बारे में बताया।  मूत्र-रोग विशेषज्ञ ने उत्तर दिया: "मैं इस समय एक बाहरी क्षेत्र के अस्पताल में हूँ, और आपके क्षेत्र के क्लिनिक में दो घंटे में पहुँच पाऊँगा। क्या आप इतने लंबे समय तक इसका सामना कर सकते हैं?" उन्होंने उत्तर दिया: "मैं कोशिश करूँगा।" उसी समय, उन्हें बचपन की एक अन्य एलोपैथिक महिला-डॉक्टर का ध्यान आया। बड़ी...

Rama khandelwal

"मुझे आज भी याद है कि एक सैनिक ने कहा था, 'बहनजी मुझे जल्द से जल्द ठीक करो ताकि मैं देश के लिए फिर से बलिदान दे सकूं,'" यह कहना है 94 वर्षीय रमा खंडेलवाल का। आज़ादी की लड़ाई में रमा, आज़ाद हिन्द फ़ौज का हिस्सा थीं और अपनी काबिलियत के बल पर उन्होंने सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट होने का सम्मान प्राप्त किया था। एक समृद्ध परिवार से आने वाली रमा ने अपने देश के लिए सभी सुख-सुविधाओं को त्याग दिया था। देशभक्ति की यह भावना उन्हें अपने दादाजी और माँ से मिली, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था। रमा बतातीं हैं कि फ़ौज के सभी सैनिकों को ज़मीन पर सोना होता था और वो फीका खाना खाते थे। फिर पूरा दिन ट्रेनिंग करते, वह भी बिना आराम किए। अपना सभी काम खुद करने का नियम था। शुरू-शुरू में उन्हें मुश्किल ज़रूर हुई क्योंकि उन्हें ऐसे जीवन की आदत नहीं थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे उन्होंने देश की आज़ादी की लड़ाई को ही अपना जीवन बना लिया। उनका दिन झंडा फहराने, परेड करने और उबले हुए चने खाने के साथ शुरू होता। उन्हें आत्म-रक्षा, राइफल शूटिंग, मशीन गन चलाने की ट्रेनिंग दी जाती और फ...

पूरा पढ़ना मजा आएगा

पूरा पढ़ना मजा आएगा *गांव के पान की दुकान पर खड़े एक 35 वर्षीय निठल्ले बेरोजगार युवक से मेंने पूछा = कुछ कमाते धमाते क्यों नहीं...?                                       दिन भर शराब पिए रहते हो, और राजश्री खाकर थूकते रहते हो?* वह बोला :-- *मेरी मर्जी* 😳 मैं बोला :-- *शादी हो गई*  ...? वह बोला :-- *हो गई* ..😊 मैं बोला :-- *कैसे किये...??* वह बोला :- *श्रम कार्ड से मुख्यमंत्री आदर्श विवाह योजना से 30,000 और अंतर्जातीय कन्यादान योजना से...250,000 मिलता है।,,,😆* मैं बोला :-- *फिर बाल बच्चे भी होंगे उसके लिये कमाओ...?* वह बोला :-- *जननी सुरक्षा से डिलेवरी फ्री और साथ मे 1500 रू का चेक और* *श्रम कार्ड में भगिनी प्रसूति योजना से 20,000 मिलता है*        😀😂😂 मैंने बोला :-- *तो बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिये कमाओ..?* वह फिर :-- *गुटका पिचक कर कहा*  *उनके लिये तो पढ़ाई, यूनिफार्म,किताबें और भोजन सब सरकार की तरफ़ से फ्री...!* और *श्रम कार्ड से मुख्यमंत्री नौनिहाल और म...

पिप्पलाद जी

श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं। इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा। जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा। एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देखकर उसका परिचय पूंछा- नारद- बालक तुम कौन हो ? बालक- यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ । नारद- तुम्हारे जनक कौन हैं ? बालक- यही तो मैं जानना चाहता हूँ । तब नारद ने ध्यान धर देखा। नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया कि  हे बालक ! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो। तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी। नारद ने बताया कि तुम्हारे पिता दधीचि की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गय...

Up to 8 individuals can participate in group video calls with the new WhatsApp client for Windows, which Mark Zuckerberg unveiled.

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Up to 8 individuals can participate in group video calls with the new WhatsApp client for Windows, which Mark Zuckerberg unveiled. Mark Zuckerberg, CEO of Meta, on Thursday unveiled a new WhatsApp software for Windows that would enable users to make group video calls with up to 8 people. Additionally, users of the new application will be able to hold audio conferences on their desktop with up to 32 participants. "We're releasing a new WhatsApp desktop application for Windows. Now you may have audio calls with up to 32 individuals and E2E encrypted video chats with up to 8 people, Zuckerberg announced on his official Facebook profile. Additionally, the tech behemoth asserted that WhatsApp now loads more quickly on the updated Windows desktop. Users of Windows and WhatsApp will be accustomed to the app's UI. In response to user criticism, Meta said, "Since introducing new multi-device capabilities, we've listened to feedback and made improvements including faster de...

समवर्ती सामाजिक अंकेक्षण के दौरान ग्राम सामाजिक एनिमेटर द्वारा निम्नलिखित मुद्दों पर विषेष ध्यान

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मुद्दों की प्राप्ति हेतु मार्गदर्षी बिन्दु समवर्ती सामाजिक अंकेक्षण के दौरान ग्राम सामाजिक एनिमेटर द्वारा निम्नलिखित मुद्दों पर विषेष ध्यान दिया जाकर मुद्दे प्राप्त किए जावें।  1. कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड नहीं है तो यह आवष्यक रूप से पता किया जावे कि सूचना बोर्ड के विरूद्ध राषि आहरित की गई है अथवा नहीं। यदि राषि आहरित की गई है एवं कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड नहीं लगा है तो उक्त आहरित गई राषि ‘‘वित्तीय अनियमितता की राषि’’ के रूप में अंकित की जावे।  2. कार्य भौतिक रूप से उपलब्ध नहीं होने एवं कार्य के विरूद्ध राषि आहरित होने की स्थिति में व्यय की गई राषि ‘‘वित्तीय अनियमितता की राषि’’ के रूप में अंकित की जावे। 3. कार्यस्थल पर कार्यस्थल सुविधा जैसे छाया,पानी, मेडिकल किट एवं झुलाघर की सुविधा नहीं पाए जाने एवं यदि उनके विरूद्ध राषि का आहरण किया गया है तो व्यय राषि ‘‘वित्तीय अनियमितता की राषि’’ के रूप में अंकित की जावे। अन्यथा यह भी अंकित किया जावे कौन-कौन सी सुविधाएं हैं या नहीं है। 4. कार्यों में मस्टर रोल में उल्लेखित मजदूर कार्य पर संलग्न नहीं पाए गए किन्तु उनकी उपस्थिति दर्ज...

सोशल ऑडिट

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सोशल ऑडिट क्या है- जनता द्वारा सरकारी योजनाओं व कार्यक्रमो की छानबीन करना ,उनकी जमीनी हकीकत जानना सोशल ऑडिट है।  ऑडिट शब्द यूनानी भाषा के आडियार  से बना है जिसका अर्थ होता  है ' सुनना '।  सामाजिक अंकेक्षण में  जनता जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को जाँचती है ,परखती है ,मूल्यांकन करती है  ततपश्चात रिपोर्ट तैयार करती है  और उसे  ग्राम सभा मे पढ़कर सुनाती है। साधारण शब्दो मे कोई कार्य जिस रुप मे होना चाहिये था उस रूप में हुआ है या नहीं इसकी जाँच  जब सरकार द्वारा एक स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से  समुदाय की सहभागिता व सहयोग के साथ  की जाती है तब वह सोशल ऑडिट अर्थात सामाजिक अंकेक्षण कहलाता है । सोशल ऑडिट का इतिहास -  1990 के दशक में राजस्थान में अरुणा राय ,निखिल डे और शंकर सिंह के नेत्रत्व में किसान मजदूर शक्ति संगठन ने  अपना पैसा  अपना हिसाब की आवाज उठाई ।यह आवाज राजस्थान में  एक जन आंदोलन बन गई ।इसी जन आंदोलन से ही सामाजिक अंकेक्षण की अवधारणा का जन्म हुआ था ।बाद में यह अवधारणा सरकार द्वारा स्वीकार कर ली गई ।2005 में महात्...