खादी प्राकृतिक पेंट

गोबर से पेंट बनाने के लिए सरकार पांच से सात दिनों की ट्रेनिंग देती है। सरकार का ज्यादा ध्यान भी ट्रेनिंग सुविधा बढ़ाने पर है। इससे अधिकतम लोग ट्रेनिंग लेकर गोबर से पेंट बनाने की फैक्ट्री खोल सकेंगे। यदि हर गांव में फैक्ट्री खुले तो रोजगार के भरपूर अवसर बनेंगे। इस पेंट को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा प्रमाणित किया गया है। अच्छी बात ये है कि पेंट में गंध भी नहीं है।

गाय के गोबर बना ये पेंट दो वेरिएंट में उपलब्ध है। इनमें डिस्टेंपर और प्लास्टिक इम्लशन शामिल है। इनकी कीमत क्रमश: 120 रु और 225 रु है। इतनी कीमत मार्केट में उपलब्ध बाकी पेंटों की तुलना में काफी कम है। इस पेंट में सीसा, पारा, क्रोमियम, आर्सेनिक और कैडमियम जैसी भारी धातुओं का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इससे यह पेंट बिल्कुल भी नुकसान नहीं देगा ।

इस पेंट से किसानों को भी फायदा होगा। असल में पेंटी की बिक्री बढ़ी तो गांवों में गोबर की खरीदारी बढ़ेगी। एक अनुमान के अनुसार एक पशु के गोबर से किसान सालाना 30000 रु कमा सकते हैं। फिलहाल गोबर का इस्तेमाल खेतों में खाद के रूप में होता। मगर आने वाले समय में गांवों में इस नये पेंट की फैक्ट्रियां लगने के बाद वहां भी गोबर की मांग होगी। इसका सीधा असल किसानों की आमदनी पर पड़ेगा।

मोदी सरकार का लक्ष्य 2022 तक किसानों की इनकम दोगुनी करने का है। ऐसे में यदि पेंट के लिए गोबर की खपत बढ़ती है तो इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। यानी किसानों को फायदा होना तय है।

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