शाखा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते हैं।
संघ गीत संघ गीत शा खा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते हैं। शाखा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते हैं। मां का वंदन सांझ-सवेरे, श्रद्धा-सुमन चढ़ाते हैं।। संघ-साधना अर्चन-पूजन, प्रतिदिन शीश झुकाते हैं। भारत मां के भव्य भाल पर भगवा ध्वज लहराते हैं।। संघस्थान मन्दिर सा पावन, मन दर्पण हो जाते हैं। शाखा है गंगा की धारा..1 इसकी रज में खेल खेल कर तन चंदन बन जाते हैं। योग, खेल रवि नमस्कार से स्वस्थ शरीर बनाते हैं।। स्नेह भाव से मिलते-जुलते, मन-मत्सर मर जाते हैं। शाखा है गंगा की धारा...2 लो...