धरती की शान तू है मनु की संतान




धरती की शान तू है मनु की संतान तेरी मुठ्ठियों मैं बंद तूफान है रे मनुष्य तू बड़ा महान है भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है तू जो चाहे पर्वत पहाड़ों को फोड़ दे तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड़ दे तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे तू जो चाहे धरती को अंबर से जोड़ दे अमर तेरे प्राण (२)....मिला तुज को वरदान तेरी आत्मा मैं स्वयं भगवान है रे मनुष्य तू बड़ा महान है भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है नयनों में ज्वाल तेरी गति में भूचाल तेरी छाती में छुपा महाकाल है पृथ्वी के लाल, तेरा हिमगिरि सा भाल तेरी भृकुटि मैं तांडव का ताल है निज को तू जान (२)....जरा शक्ति पहचान तेरी वाणी में युग का आह्वान है रे मनुष्य तू बड़ा महान है भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है धरती सा धीर तू है अग्नि सा वीर तू जो चाहे तो काल को भी थाम ले पापों का प्रलय रुके, पशुता का शीश जुके तू जो अगर हिम्मत से काम ले गुरु सा मतिमान (२)....पवन सा तू गतिमान तेरी नभसे भी ऊँची उड़ान है रे मनुष्य तू बड़ा महान है भूल मत मनुष्य तू बड़ा महान है

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