अमरकंटक के बारे में जानकारी
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🌄 अमरकंटक के बारे में जानकारी
अमरकंटक मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित एक पवित्र और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर तीर्थ स्थल है। इसे नर्मदा, सोन और जौहिला नदियों का उद्गम स्थल माना जाता है। यह विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के संगम पर बसा हुआ है।
🌊 1. नदियों का उद्गम
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नर्मदा नदी का उद्गम यहीं से होता है।
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सोन नदी और जोहिला नदी भी अमरकंटक से ही निकलती हैं।
नर्मदा को हिंदू धर्म में गंगा के समान पवित्र माना जाता है।
🛕 2. प्रमुख धार्मिक स्थल
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नर्मदा उद्गम मंदिर – नर्मदा माता का मुख्य मंदिर।
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कपिल धारा – सुंदर जलप्रपात, जहाँ नर्मदा का जल ऊँचाई से गिरता है।
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दूध धारा – दूध की धारा जैसा दिखने वाला झरना।
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कल्याण आश्रम – धार्मिक व आध्यात्मिक केंद्र।
🌳 3. प्राकृतिक सौंदर्य
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घने जंगल, पहाड़ और शुद्ध वातावरण।
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पास में मैकल पर्वत क्षेत्र स्थित है।
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यहाँ औषधीय पौधों की भी बहुतायत है।
🗺️ 4. कैसे पहुँचें?
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निकटतम रेलवे स्टेशन: पेंड्रा रोड (छत्तीसगढ़)
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निकटतम बड़ा शहर: जबलपुर / बिलासपुर
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सड़क मार्ग से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से अच्छी कनेक्टिविटी।
🙏 5. धार्मिक महत्व
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अमरकंटक को “तीर्थराज” भी कहा जाता है।
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यहाँ नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत की जाती है।
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मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि पर विशेष मेले लगते हैं।
🌊 नर्मदा नदी की परिक्रमा क्यों की जाती है?
नर्मदा परिक्रमा एक अत्यंत पवित्र धार्मिक साधना मानी जाती है। श्रद्धालु माता नर्मदा को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूरी धारा के किनारे-किनारे पैदल परिक्रमा करते हैं। इसके पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं।
🙏 1. धार्मिक मान्यता
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हिंदू धर्म में नर्मदा को जीवंत देवी माना गया है।
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मान्यता है कि नर्मदा के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है।
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पुराणों में उल्लेख मिलता है कि नर्मदा का जल स्वयं शिव का आशीर्वाद है।
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कथा के अनुसार भगवान भगवान शिव के तप से नर्मदा प्रकट हुईं।
🕉️ 2. आध्यात्मिक शुद्धि
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परिक्रमा लगभग 3 वर्ष, 3 माह, 13 दिन में पूर्ण की जाती है (पारंपरिक नियम)।
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साधक संयम, ब्रह्मचर्य और साधना का पालन करते हैं।
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इसे आत्मशुद्धि, मन की शांति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है।
🔥 3. विशेष मान्यता
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कहा जाता है कि जहाँ गंगा नदी में स्नान से पुण्य मिलता है, वहीं नर्मदा के दर्शन मात्र से पुण्य प्राप्त होता है।
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इसलिए नर्मदा को “रेवा” और “मोक्षदायिनी” भी कहा जाता है।
🚶 4. परिक्रमा की परंपरा
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परिक्रमा की शुरुआत प्रायः अमरकंटक से होती है।
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श्रद्धालु नदी के एक किनारे से समुद्र (अरब सागर) तक जाते हैं और दूसरे किनारे से वापस लौटते हैं।
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पूरी दूरी लगभग 2600–3000 किमी मानी जाती है।
🌿 5. प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव
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परिक्रमा के दौरान साधक गाँव-गाँव में रुकते हैं।
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यह यात्रा प्रकृति, साधना और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का माध्यम भी है।
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