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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी द्वारा अंग्रेजी नववर्ष पर रचित एक प्रेरणादायक कविता

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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी द्वारा अंग्रेजी नववर्ष पर रचित एक प्रेरणादायक कविता:-    ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं।  है अपनी ये तो रीत नहीं, है अपना ये व्यवहार नहीं।  धरा ठिठुरती है सर्दी से, आकाश में कोहरा गहरा है।  बाग़ बाज़ारों की सरहद पर, सर्द हवा का पहरा है।  सूना है प्रकृति का आँगन, कुछ रंग नहीं , उमंग नहीं।  हर कोई है घर में दुबका हुआ, नव वर्ष का ये कोई ढंग नहीं।  चंद मास अभी इंतज़ार करो, निज मन में तनिक विचार करो। नये साल नया कुछ हो तो सही, क्यों नक़ल में सारी अक्ल बही।  उल्लास मंद है जन -मन का, आयी है अभी बहार नहीं।  ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं, है अपना ये त्यौहार नहीं।  ये धुंध कुहासा छंटने दो, रातों का राज्य सिमटने दो।  प्रकृति का रूप निखरने दो, फागुन का रंग बिखरने दो।  प्रकृति दुल्हन का रूप धार, जब स्नेह – सुधा बरसायेगी।  शस्य – श्यामला धरती माता, घर -घर खुशहाली लायेगी।  तब चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि, नव वर्ष मनाया जायेगा।  आर्यावर्त की पुण्य भूमि पर, जय गान सुनाया जा...

जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो, जागो तो एक बार हिंदु जागो तो

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जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो, जागो तो एक बार हिंदु जागो तो जागे थे वीर शिवाजी भाग गये सब मुल्ला काजी मच गई हा हा कार हिंदु जागो तो ।। जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो ।। जागे थे गुरु गोविन्द प्यारे देश पे चारो बच्चे वारे वार दिया परिवार, हिंदु जागो तो ।। जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो ।। जागी थी जब झांसी की रानी, मर गई पर हार न मानी चमक उठी तलवार, हिन्दु जागो तो ।। जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो ।। जागे थे भगत सिंग प्यारे असेम्ब्ली मे लग गये नारे भडक गई सरकार हिन्दु जागो तो ।। जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो ।। भारत मा के सपूत जागे कश्मीर मे ध्वज लेहराए भागे आतन्कवाद हिन्दु जागो तो ।। जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो ।। हिन्दु जागे देश जागे देश के सब दुश्मन भागे बने ये हिन्दु राष्ट्र हिन्दु जगो तो ।। जागो तो एक बार हिन्दू जागो तो ।।

राजराजेश्वरी बस्ती में नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित

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नेत्र शिविर मण्डला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नगर मंडला, सेवा विभाग के द्वारा राजराजेश्वरी बस्ती में नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। जिसमें मोतियाबिंद से ग्रसित मरीजों की जांच एवं दृष्टि दोष से पीडि़त व्यक्तियों को चश्मे के नंबर प्रदान कर शासन से नि:शुल्क चश्मे दिलाने के लिए कार्यवाही की गई। नेत्र जॉच के दौरान मिले ऐसे मरीज जिनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन होना है, उन मरीजों का ऑपरेशन जिला चिकित्सालय में 20 नवंबर दिन मंगलवार को किया जाएगा। शिविर के दौरान 12 मोतियाबिंद मरीज, 11 दृष्टि दोष से पीडि़त मरीज सहित 41 मरीजों की जांच की गई। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेवा विभाग सहित जिला, नगर एवं बस्ती के स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

शाखा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते हैं।

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संघ गीत संघ गीत शा खा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते हैं। शाखा है गंगा की धारा, डुबकी नित्य लगाते हैं। मां का वंदन सांझ-सवेरे, श्रद्धा-सुमन चढ़ाते हैं।। संघ-साधना अर्चन-पूजन, प्रतिदिन शीश झुकाते हैं। भारत मां के भव्य भाल पर भगवा ध्वज लहराते हैं।। संघस्थान मन्दिर सा पावन, मन दर्पण हो जाते हैं।                                            शाखा है गंगा की धारा..1 इसकी रज में खेल खेल कर तन चंदन बन जाते हैं। योग, खेल रवि नमस्कार से स्वस्थ शरीर बनाते हैं।। स्नेह भाव से मिलते-जुलते, मन-मत्सर मर जाते हैं।                                           शाखा है गंगा की धारा...2 लो...

10 नवंबर 1659 यह #शिवप्रताप_दिवस हमारी स्मृतियों में सदा रहना चाहिए क्योंकि ये याद दिलाता है उन धर्मवीर छत्रपति शिवाजी महाराज की...उनकी वीरता की... बुद्धिमता की, कूटनीतिज्ञता की, जिनके बारे में महाकवि भूषण ने लिखा है

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10 नवम्बर / ऐतिहासिक दिवस... क्या इस दरबार में कोई ऐसा है जो उस काफिर शिवाजी को नेस्ताबूद करके इस बीजापुरी सल्तनत को महफूज कर सके बीजापुर के दिवंगत सुलतान की बड़ी बेगम की आवाज भरे दरबार में मौजूद सबके कानों पर पड़ी पर किसी की हिम्मत न हुई कि वो अपने को आग में कूदने को प्रस्तुत कर सके कारण उड़ते उड़ते खबरें सब जागीरदारों, मनसबदारों और सूबेदारों तक पहुँच ही चुकी थी कि 'पहाड़ी चूहा' आग है और जो आग में कूदा वो गया...ऐसे में सामने आया बड़ी बेगम का बहनोई क्रूरता का पर्याय कई युद्धों में बीजापुर को विजय दिला चुका सेनानायक बलिष्ठ पठान अफजल खान खुले दरबार में मुक्तकंठ से आत्मप्रशंसा करते हुए उसने कहा...वह उस कम्बख्त हिन्दू लुटेरे को अपने घोड़े से नीचे उतरे बिना ही पकड़ लेगा उसे 'चूहे' को पिंजरे में बंद करके बीजापुर लाएगा ताकि जनता का मनोरंजन हो सके... बड़ी बेगम की खुशी का ठिकाना ना रहा और दरबार को ऐसा लगा कि बस अब तो उसे 'चूहे' से मुक्ति मिली ही मिली अफजल खान तुरंत अपने मिशन की तैयारियों में लग गया उसके दुर्भाग्य पर चिंतन करते हुए एक मुस्लिम इतिहासकार ने लिखा है... मौत का फरिश्ता...

श्री नर्मदाष्टकम

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नर्मदा नदी श्री नर्मदाष्टकम सबिंदु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितम द्विषत्सु पाप जात जात कारि वारि संयुतम कृतान्त दूत काल भुत भीति हारि वर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 1 त्वदम्बु लीन दीन मीन दिव्य सम्प्रदायकम कलौ मलौघ भारहारि सर्वतीर्थ नायकं सुमस्त्य कच्छ नक्र चक्र चक्रवाक् शर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 2 महागभीर नीर पुर पापधुत भूतलं ध्वनत समस्त पातकारि दरितापदाचलम जगल्ल्ये महाभये मृकुंडूसूनु हर्म्यदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 3 गतं तदैव में भयं त्वदम्बु वीक्षितम यदा मृकुंडूसूनु शौनका सुरारी सेवी सर्वदा पुनर्भवाब्धि जन्मजं भवाब्धि दुःख वर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 4 अलक्षलक्ष किन्न रामरासुरादी पूजितं सुलक्ष नीर तीर धीर पक्षीलक्ष कुजितम वशिष्ठशिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 5 सनत्कुमार नाचिकेत कश्यपात्रि षटपदै धृतम स्वकीय मानषेशु नारदादि षटपदै: रविन्दु रन्ति देवदेव राजकर्म शर्मदे त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे 6 अलक्षलक्ष लक्षपाप लक्ष सार सायुधं ततस्तु जीवजंतु तंतु भुक्तिमुक्ति दायकं विरन्ची विष्...

कार्य व्यवस्था

सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की। सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा? महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो। विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है। भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया। श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,  उनके भाई बलराम खेती करते थे, हमेशा हल साथ रखते थे। यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्रीकृषण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया। राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे। उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार। वर...